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महाकाल मंदिर में सुरक्षा मामलों को लेकर सहायक प्रशासक की लापरवाही, कलेक्टर ने दिया नोटिस
उज्जैन : महाकाल मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक अहम मसले पर पूछी गई जानकारी पर सहायक मंदिर प्रशासक को सुना-अनसुना करना महंगा पड़ गया। कलेक्टर ने सहायक मंदिर प्रशासक को शोकाज़ नोटिस जारी कर कार्रवाई करने की बात तक कही है। इस मामले में कलेक्टर ने कहा है कि यदि मैंने शोकाज नोटिस जारी किया है तो कारण महत्वपूर्ण ही होगा।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था के मसले पर समय-समय पर देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां कलेक्टर और एसपी से जानकारी तलब करती हैं। राजधानी भोपाल से भी कई बार अलर्ट जारी होता है। ऐसे में महाकाल मंदिर में नियुक्त सहायक मंदिर प्रशासक जो स्वयं प्रशासनिक सेवा से जुड़ी हैं ने कलेक्टर द्वारा पूछी गई जानकारी को समय पर मुहैया ना कराने की गुस्ताखी कर डाली। अब सहायक मंदिर प्रशासक प्रीति चौहान को कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए एक विस्तृत शोकाज नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जारी होने की खबर मिलते ही सहायक मंदिर प्रशासक छुट्टी पर चलीं गईं।
आने वाले समय में महाशिवरात्रि सहित कई महत्वपूर्ण त्योहार महाकाल मंदिर में भीड़ प्रबंधन के साथ सिक्योरिटी से जुड़े हैं। ऐसे में महाकाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आए दिन देश की आला सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं। इसी बीच कलेक्टर संकेत भोंडवे ने सहायक मंदिर प्रशासक से सुरक्षा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी जो उन्हें समय पर प्रेषित करना था। यह जानकारी सहायक मंदिर प्रशासक प्रीति चौहान उपलब्ध न करा सकी। इस पर कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से शोकाज़ नोटिस जारी कर उनसे कारण तो पूछा ही है, साथ ही यह भी कहा है कि क्यों ना आपके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
याद रहे महाकाल मंदिर में सहायक मंदिर प्रशासक प्रीति चौहान ने जब से पदभार संभाला है, तब से वे अपनी एक अलग ही कार्यशैली के कारण चर्चाओं में हैं। कुछ लोग उन्हें दबंग प्रशासनिक अफसर के रूप में भी जानते हैं तो महाकाल मंदिर में ही लोग उन्हें मनमाने कार्य करने वाली लेडी अफसर के रूप में पहचानते हैं। फिलहाल कलेक्टर के पत्र नजरअंदाज करना सहायक मंदिर प्रशासक को महंगा पड़ सकता है। चर्चा है कि उन्हें मंदिर व्यवस्था से भी दूर किया जा सकता है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी ऐसी किसी बात से इनकार कर रहे हैं।
मंदिर के पाट पर फिर हुआ बवाल
मंदिर में पाट व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया है। पता चला है कि विगत दिनों मंदिर के प्रशासक अवधेश शर्मा को पं. रमण गुरु ने अपने पाट पर एक और उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। पंडितों और पुरोहितों के साथ मंदिर के पंडों-पुजारियों में उस समय खलबली मच गई जब उस आवेदन को मंदिर प्रशासक ने मान्य भी कर दिया। पाट उत्तराधिकारी के रूप में आवेदन के ओके होते ही पुजारियों और पुरोहितों ने मंदिर प्रशासक को विरोध दर्ज कराया और जानकारी दी कि वास्तविक रूप से मंदिर में पाट प्रतिनिधि के रूप में रमण त्रिवेदी किसी अन्य को नियुक्त ही नहीं करवा सकते।
भ्रमित जानकारी देने पर मंदिर प्रशासक ने पं. रमण त्रिवेदी को परोक्ष रूप से ना केवल फटकार लगाई, बल्कि उस आवेदन को ही तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यह मामला अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि पं. त्रिवेदी के घर में आयोजित मांगलिक प्रसंग के बाद इसे फिर से उठाया जाएगा। याद रहे मंदिर प्रशासक ने अरसे पहले एक श्रद्धालु से अशिष्टता के आरोप में पं. त्रिवेदी को मंदिर की पूजा- पाट व्यवस्था से पृथक कर दिया था। महीनों इंतजार और एप्रोच के बाद उन्हें मंदिर की मुख्य धारा में लौटाया गया। अब एक बार फिर मंदिर प्रशासक को गलत जानकारी देकर दिग्भ्रिमित करने पर संभावना है कि पं. त्रिवेदी पर फिर कोई कड़ी कार्रवाई हो जाए।